आत्म प्रत्याशा को विकसित करना

आत्म प्रत्याशा को विकसित करना

हम में से अधिकांश लोगों की प्रत्याशा या चाह का स्तर हमारी क्षमता और भीतर की इच्छाओ की तुलना में काफी नीचा होता है|
ये लगभग वैसा है जैसा कि हम किसी का इंतजार कर रहे हों कि कोई आएगा और यश बात को पक्का करेगा कि हम अधिक चुनौतियों के लायक हैं या नहीं ,जबकि वास्तव में ,हमारे अपने सिवाय कोई भी ऐसा नहीं कर सकता |
एक बड़ी सच्ची कहानी है जो इस बात पर अच्छी तरह से रोशनी डालती है|बरसों पहलो की बात है ,वह एक तूफानी रात थी,जब एक बुजुर्ग दम्पति ने होटल में प्रवेश किया और एक कमरे के लिए पूछा |क्लर्क ने जबाब देते हुए कहा कि ,”में मभी चाहता हूं”|”हमारा होटल एक सम्मेलन में भाग लेने आये लोगों के समूह से भरा पड़ा है|आमतौर पर होटल के भरे होने की स्थिति में में आपको दूसरे होटल भेज देता ,लेकिन ऐसे तूफान में आपको फिर से बाहर जाने के लिए कहने के बारे में सोच भी नहीं सकता|आप लोग मेरे कमरे में क्यों नहीं ठहर जाते?” उस जवान व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए बुजुर्ग दम्पति के आगे प्रस्ताव रखा |”वह कोई बड़ा आलीशान कमरा नहीं है,लेकिन साफ-सुथरा है| मुझे यहां ऑफिस में अभी काम पूरा करना है जब तक कि रात की पारी वाली दूसरा व्यक्ति न आ जाए|

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